ये बेटियाँ …..

आज जब दफ्तर से आया, तो मेज पर एक शादी का न्यौता पाया,
लिफाफा खोला और देखा, की कैसे कुछ शब्द दिल को छू जाते है,
माँ बाप और बच्चे, कैसे मिलते है और कैसे बिछड़ जाते है,
बेटियाँ होती है घर की शोभा,  पर उनको तो होना है एक दिन पराया,
इन कुछ पंक्तियों ने मुझे यह सब कुछ इस तरह समझाया …..

                                                                            – यतिन (Original)

ओस की एक बूँद होती है बेटियाँ | स्पर्श खुरदरा हो तो रोती है बेटियाँ ||
रोशन करेगा बेटा तो एक ही कुल को | दो-दो कुल की लाज होती है बेटियाँ ||
कोई नहीं है एक दुसरे से कम | हीरा अगर है बेटा तो मोती है बेटियाँ ||
काँटों की राह वे खुद ही चलती रहेंगी | औरों के लिए फूल बोती है बेटियाँ ||
विधि का विधान है, यही समाज की परंपरा | अपने प्रियों को छोड़ पिया के घर जाती है बेटियाँ ||
बेटी पराया धन होती है यह सुनने में आया | दर्द विदाई क्या होता है, आज समझ में आया ||
ग़म और ख़ुशी का रिश्ता कैसा यह अजीब है भाई | हमारी परछाई हमसे ले रही विदाई ||

                                                                          –  मम्मी पापा(Copied)

2 thoughts on “ये बेटियाँ …..

  1. बहोत खूब……दिल को छु गयीं आपकी ये पंक्तियाँ…..बिलकुल सीधे साधे अंदाज़ में बड़ी बात कही है आपने……
    हमेशा कहता हूँ, आज आपके ब्लॉग के माध्यम से फिर यही दुआ मांगता हूँ…..अल्लाह मुझे सिर्फ बेटी ही देना !!!

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